श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.13.21 
पूर्वे जगदानन्देर इच्छा वृन्दावन याइते ।
प्रभु आज्ञा ना देन ताँरे, ना पारे चलिते ॥21॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में जब जगदानंद पंडित ने वृन्दावन जाने की इच्छा व्यक्त की थी, तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें अनुमति नहीं दी थी, इसलिए वे नहीं जा सके थे।
 
Earlier, when Jagadananda Pandit wanted to go to Vrindavan, Sri Chaitanya Mahaprabhu did not give him permission, hence he could not go.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)