श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.13.20 
ताते शयन करेन प्रभु, - देखि’ सबे सुखी ।
जगदानन्द - भितरे क्रोध बाहिरे महा - दुःखी ॥20॥
 
 
अनुवाद
भगवान को उस शय्या पर लेटे देखकर सभी लोग प्रसन्न हुए, परन्तु जगदानन्द भीतर से क्रोधित थे और बाहर से वे बहुत दुखी दिखाई दे रहे थे।
 
Everyone was happy to see Mahaprabhu lying on that bed, but Jagannath was angry from within and looked very sad from outside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)