श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.13.18 
नखे चि रि’ चिरि’ ताहा अति सूक्ष्म कैला ।
प्रभुर बहिर्वास दुइते से सब भरिला ॥18॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने अपने नाखूनों से पत्तों को बहुत बारीक रेशों में फाड़ दिया और उन रेशों से श्री चैतन्य महाप्रभु के दो बाहरी वस्त्र भर दिए।
 
Then he tore these leaves into very fine fibres with his nails and filled the two outer garments (Uttariya) of Sri Chaitanya Mahaprabhu with these fibres.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)