श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.13.16 
स्वरूप - गोसाञि आसि’ पण्डिते कहिला ।
शुनि’ जगदानन्द मने महा - दुःख पाइला ॥16॥
 
 
अनुवाद
जब स्वरूप दामोदर लौटे और ये सारी घटनाएँ बताईं, तो जगदानंद पंडित को बहुत दुःख हुआ।
 
When Swarup Damodar returned and told all the incidents to Jagannath Pandit, he felt very sad.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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