श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  3.13.138 
ये एइ - सकल कथा शुने श्रद्धा करि’ ।
ताँरे कृष्ण - प्रेम - धन देन गौरहरि ॥138॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी इन सभी विषयों को श्रद्धा और प्रेम के साथ सुनता है, उसे श्री चैतन्य महाप्रभु (गौरहरि) कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम प्रदान करते हैं।
 
To one who listens to these stories with devotion and love, Sri Chaitanya Mahaprabhu (Gaurhari) bestows Krishna-love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)