श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  3.13.130 
गोविन्द - चरणे कैला आत्म - समर्पण ।
गोविन्द - चरणारविन्द - याँर प्राण - धन ॥130॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रघुनाथ भट्ट भगवान गोविंद के चरणकमलों में पूर्णतया समर्पित हो गये और वे चरणकमल ही उनके जीवन और आत्मा बन गये।
 
In this way Raghunath Bhatt completely surrendered himself to the lotus feet of Lord Govind and his lotus feet became the basis of his life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)