पिक - स्वर - कण्ठ, ताते रागेर विभाग ।
एक - श्लोक पड़िते फिराय तिन - चारि राग ॥128॥
अनुवाद
उनकी वाणी कोयल के समान मधुर थी और वे श्रीमद्भागवत के प्रत्येक श्लोक को तीन-चार सुरों में सुनाते थे। इस प्रकार उनका पाठ सुनने में अत्यंत मधुर लगता था।
His voice was as sweet as the voice of a cuckoo, and he could recite each verse of the Srimad Bhagavatam in three or four different ragas. His recitations were incredibly melodious.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥