श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.13.126 
रूप - गोसाञि र सभाय करेन भागवत - पठन ।
भागवत पड़िते प्रेमे आउलाय ताँर मन ॥126॥
 
 
अनुवाद
रूप और सनातन के साथ श्रीमद्भागवत का पाठ करते समय रघुनाथ भट्ट कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम से अभिभूत हो जाते थे।
 
When Raghunath Bhatta read the Srimad Bhagavatam in the company of Rupa and Sanatana, he would become overwhelmed with love for Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)