श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  3.13.124 
सेइ माला, छुटा पान प्रभु ताँरे दिला ।
‘इष्ट - देव’ करि’ माला धरिया राखिला ॥124॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने माला और पान रघुनाथ भट्ट को दे दिया, जिन्होंने उन्हें पूजनीय देवता के रूप में स्वीकार किया और उन्हें बहुत सावधानी से संरक्षित किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu gave that rosary and betel leaf to Raghunath Bhatt, who accepted them as his worshipable deity and kept them safe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)