श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 13: जगदानन्द पण्डित तथा रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के साथ लीलाएँ  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.13.105 
एइ - मत प्रभु - सङ्गे रहिला अष्ट - मास ।
दिने दिने प्रभुर कृपाय बाड़ये उल्लास ॥105॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रघुनाथ भट्ट लगातार आठ महीने तक श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ रहे और भगवान की कृपा से उन्हें प्रतिदिन दिव्य सुख की वृद्धि होती रही।
 
In this way Raghunath Bhatta remained with Sri Chaitanya Mahaprabhu for eight consecutive months and by the grace of Mahaprabhu he experienced more and more divine happiness every day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)