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श्लोक 3.12.95  |
एइ - मत जगदानन्द शचीमाता - सने ।
चैतन्येर सुख - कथा कहे रात्रि - दिने ॥95॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार जगदानंद पंडित और माता शची दिन-रात श्री चैतन्य महाप्रभु की प्रसन्नता के विषय में बातें करते रहते थे। |
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| In this way, Jagadananda Pandit and Shachimata talked day and night about the happiness of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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