श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.12.90 
जगदानन्द कहे , - “माता, कोन कोन दिने ।
तोमार एथा आ सि’ प्रभु करेन भोजने ॥90॥
 
 
अनुवाद
जगदानंद पंडित ने कहा, "मेरी प्रिय मां, कभी-कभी भगवान यहां आते हैं और आपके द्वारा अर्पित सारा भोजन खा जाते हैं।
 
Jagadananda Pandit said, “O Mother, sometimes Mahaprabhu comes here and eats all the food you give him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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