श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.12.8 
शिवानन्द - सेन आर आचार्य - गोसा ञि ।
नवद्वीपे सब भक्त हैला एक ठाञि ॥8॥
 
 
अनुवाद
शिवानन्द सेना, अद्वैत आचार्य और अन्य लोगों के नेतृत्व में सभी भक्त नवद्वीप में एकत्रित हुए।
 
All the devotees like Shivanand Sen, Advaita Acharya etc. gathered in Navadweep.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)