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श्लोक 3.12.73  |
सन्यासी मानुष मोर, नाहि कोन धन ।
कि दिया तोमार ऋण करिमु शोधन? ॥73॥ |
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| अनुवाद |
| मैं एक भिखारी हूँ और मेरे पास पैसे नहीं हैं। आपने मुझ पर जो उपकार किया है, उसका ऋण मैं कैसे चुकाऊँ? |
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| "I am a sannyasi and I have no money. How can I repay the kindness you have shown me?" |
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