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श्लोक 3.12.69  |
नित्यानन्दे आज्ञा दि लुँ गौड़ेते रहिते ।
आज्ञा लङ्घि’ आइला, कि पारि बलिते ? ॥69॥ |
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| अनुवाद |
| "मैंने श्री नित्यानंद प्रभु को बंगाल न छोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन वे मेरी आज्ञा का उल्लंघन करके मुझसे मिलने आए हैं। मैं क्या कहूँ? |
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| "I had ordered Sri Nityananda Prabhu not to leave Bengal, but he has disobeyed and come to see me. What can I say?" |
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