श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.12.69 
नित्यानन्दे आज्ञा दि लुँ गौड़ेते रहिते ।
आज्ञा लङ्घि’ आइला, कि पारि बलिते ? ॥69॥
 
 
अनुवाद
"मैंने श्री नित्यानंद प्रभु को बंगाल न छोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन वे मेरी आज्ञा का उल्लंघन करके मुझसे मिलने आए हैं। मैं क्या कहूँ?
 
"I had ordered Sri Nityananda Prabhu not to leave Bengal, but he has disobeyed and come to see me. What can I say?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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