श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.12.67 
“प्रति - वर्षे आइस सबे आमारे देखिते ।
आसिते याइते दुःख पाओ बहु - मते ॥67॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "तुम सब हर साल मुझसे मिलने आते हो। यहाँ आना और फिर लौट जाना तुम्हें ज़रूर बहुत कष्ट देता होगा।"
 
Mahaprabhu said, "You all come to see me every year. You must be experiencing great hardship in coming here and returning.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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