श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  3.12.58 
‘परमेश्वर कुशल हओ, भाल हैल, आइला’ ।
‘मुकुन्दार माता आसियाछे’ सेह प्रभुरे कहिला ॥58॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "परमेश्वर, आपका कल्याण हो। यह बहुत अच्छा है कि आप यहाँ आए।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "Goodness to you, Lord. It is good that you have come here." Then the Lord told Mahaprabhu, "Mukunda's mother has also come."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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