श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.12.54 
नदीया - वासी मोदक, तार नाम ‘परमेश्वर’ ।
मोदक वेचे, प्रभुर वाटीर निकट तार घर ॥54॥
 
 
अनुवाद
नादिया में परमेश्वर नाम का एक निवासी था, जो श्री चैतन्य महाप्रभु के घर के पास रहता था।
 
There was a confectioner (modak) named Parameshwar, a resident of Nadia, who lived near the house of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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