श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.12.49 
प्रभु - आज्ञाय धरिला नाम ‘परमानन्द - दास’ ।
‘पुरी - दास’ करि’ प्रभु करेन उपहास ॥49॥
 
 
अनुवाद
भगवान के आदेशानुसार बालक का नाम परमानंद दास रखा गया और भगवान ने मजाक में उसे पुरी दास कहा।
 
As per Mahaprabhu's orders, the child was named Paramananda Das and Mahaprabhu jokingly called him Puri Das.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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