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श्लोक 3.12.28  |
‘शास्ति’ - छले कृपा कर, - ए तोमार ‘करुणा’ ।
त्रिजगते तोमार चरित्र बुझे कोन् जना? ॥28॥ |
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| अनुवाद |
| "हे प्रभु! मुझे दण्ड देना आपकी अहैतुकी कृपा है। तीनों लोकों में कौन आपके वास्तविक चरित्र को समझ सकता है? |
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| "O Lord, Your punishment is Your causeless mercy. Who in the three worlds can understand Your true character? |
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