श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.12.28 
‘शास्ति’ - छले कृपा कर, - ए तोमार ‘करुणा’ ।
त्रिजगते तोमार चरित्र बुझे कोन् जना? ॥28॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु! मुझे दण्ड देना आपकी अहैतुकी कृपा है। तीनों लोकों में कौन आपके वास्तविक चरित्र को समझ सकता है?
 
"O Lord, Your punishment is Your causeless mercy. Who in the three worlds can understand Your true character?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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