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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार
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श्लोक 143
श्लोक
3.12.143
रसुइर कार्य कैराछे रामाइ, रघुनाथ ।
इँहा सबाय दिते चाहि किछु व्यञ्जन - भात” ॥143॥
अनुवाद
“रामाई पंडित और रघुनाथ भट्ट ने खाना बनाया है, और मैं उन्हें कुछ चावल और सब्जियां देना चाहता हूं।”
"Ramai Pandit and Raghunath Bhatt have done the cooking. I want to give them some food and vegetables."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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