श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  3.12.141 
चन्दनादि ल ञा प्रभु वसिला सेइ स्थाने ।
‘आमार आगे आजि तुमि करह भोजने’ ॥141॥
 
 
अनुवाद
भगवान चंदन की लुगदी और माला स्वीकार कर बैठ गए और बोले, "अब, मेरे सामने, तुम भोजन करो।"
 
After accepting the sandalwood paste and garland, Mahaprabhu sat down and said, “Now please eat in front of me.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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