श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  3.12.139 
तबे प्रभु कहेन करि’ विनय - सम्मान ।
‘दश - गुण खाओयाइला एबे कर समाधान’ ॥139॥
 
 
अनुवाद
अंत में भगवान ने आदरपूर्वक कहा, "मेरे प्रिय जगदानंद, तुमने मुझे पहले ही मेरी आदत से दस गुना ज़्यादा खिला दिया है। अब कृपया रुकें।"
 
Finally, Mahaprabhu respectfully requested, "O Jagadananda, you have fed me ten times more food than I am accustomed to eating. Now please stop."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)