श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  3.12.129 
“आपने प्रसाद लह, पाछे मुञि ल - इमु ।
तोमार आग्रह आमि केमने खण्डिमु?” ॥129॥
 
 
अनुवाद
"कृपया पहले स्वयं प्रसाद ग्रहण करें, फिर मैं खाऊँगा। मैं आपके अनुरोध को अस्वीकार नहीं करूँगा।"
 
Please take the prasad first. I will eat later. I will not refuse your request."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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