श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.12.120 
तैल भाङ्गि’ सेइ पथे निज - घर गिया ।
शुइया रहिला घरे कपाट खिलिया ॥120॥
 
 
अनुवाद
घड़ा तोड़ने के बाद जगदानन्द पंडित अपने घर लौट आये, दरवाजा बंद कर लिया और लेट गये।
 
After breaking the pot, Jagannath Pandit returned to his house, closed the door from inside and lay down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)