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अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार
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श्लोक 112
श्लोक
3.12.112
शुनि’ प्रभु कहे किछु सक्रोध वचन ।
मर्दनिया एक राख करिते मर्दन! ॥112॥
अनुवाद
जब भगवान ने यह सुना तो वे क्रोधित होकर बोले, "मेरी मालिश करने के लिए एक मालिश करने वाला क्यों नहीं रखा?"
When Mahaprabhu heard this, he became angry and said, “Then why don't you also hire an oil masseur to massage me?
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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