श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.12.11 
श्रीवासादि चारि भाइ, सङ्गेते मालिनी ।
आचार्यरत्नेर सङ्गे ताँहार गृहिणी ॥11॥
 
 
अनुवाद
श्रीवास ठाकुर भी अपने तीन भाइयों और अपनी पत्नी मालिनी के साथ वहाँ थे। आचार्यरत्न भी अपनी पत्नी के साथ वहाँ थे।
 
Srivasa Thakura was accompanied by his three brothers and his wife Malini. Acharyaratna was also accompanied by his wife.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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