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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार
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श्लोक 107
श्लोक
3.12.107
एक - कलस सुगन्धि तैल गौड़ेते करिया ।
इहाँ आनियाछे बहु यतन करिया” ॥107॥
अनुवाद
“उन्होंने बंगाल में इसका एक बड़ा जग तैयार किया और बड़ी सावधानी से इसे यहां लाए हैं।”
“He has prepared a big pot of oil in Bengal and has brought it here with great care.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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