श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  3.12.102 
शिवानन्द - सेन - गृहे याजा रहिला ।
‘चन्दनादि तैल ताहाँ एक - मात्रा कैला ॥102॥
 
 
अनुवाद
जगदानंद पंडित कुछ समय तक शिवानंद सेना के घर पर रहे और उन्होंने लगभग सोलह सेर सुगंधित चंदन का तेल तैयार किया।
 
Jagadananda Pandit stayed for some time at the house of Shivananda Sen. It was then that the two of them prepared about sixteen seers of fragrant sandalwood oil.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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