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श्लोक 3.12.102  |
शिवानन्द - सेन - गृहे याजा रहिला ।
‘चन्दनादि तैल ताहाँ एक - मात्रा कैला ॥102॥ |
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| अनुवाद |
| जगदानंद पंडित कुछ समय तक शिवानंद सेना के घर पर रहे और उन्होंने लगभग सोलह सेर सुगंधित चंदन का तेल तैयार किया। |
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| Jagadananda Pandit stayed for some time at the house of Shivananda Sen. It was then that the two of them prepared about sixteen seers of fragrant sandalwood oil. |
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