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श्लोक 84
श्लोक
3.11.84
स्वरूप, जगदानन्द, काशीश्वर, शङ्कर ।
चारि - जन परिवेशन करे निरन्तर ॥84॥
अनुवाद
चार व्यक्तियों - स्वरूप दामोदर, जगदानंद, काशीश्वर और शंकर - ने लगातार प्रसाद वितरित किया।
Swaroop Damodar, Jagadananda, Kashishwar and Shankar - these four persons continuously distributed Prasad.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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