| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण » श्लोक 83 |
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| | | | श्लोक 3.11.83  | स्वरूप कहे , - “प्रभु, वसि’ करह दर्शन ।
आमि इँहा - सबा लञा करि परिवेशन ॥83॥ | | | | | | | अनुवाद | | स्वरूप दामोदर गोस्वामी ने श्री चैतन्य महाप्रभु से अनुरोध किया, "कृपया बैठ जाएँ और देखें। इन लोगों की सहायता से मैं प्रसाद बाँटूँगा।" | | | | Svarupa Damodara Goswami requested Sri Chaitanya Mahaprabhu, "Please sit down and watch. I will distribute this prasada through these people who are helping me." | | ✨ ai-generated | | |
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