| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 3.11.8  | जय गौर - भक्त - गण, गौर याँर प्राण ।
सब भक्त मिलि’ मोरे भक्ति देह’ दान ॥8॥ | | | | | | | अनुवाद | | श्री चैतन्य महाप्रभु के सभी भक्तों की जय हो, क्योंकि भगवान ही उनके प्राण और आत्मा हैं! आप सभी मुझ पर अपनी भक्ति प्रदान करें। | | | | All the devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu are victorious, for Mahaprabhu is their life and soul. Please give me the gift of devotion, all of you. | | ✨ ai-generated | | |
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