श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.11.78 
स्वरूप - गोसा ञि कहिलेन सब पसारिरे ।
एक एक द्रव्येर एक एक पुञ्जा देह’ मोरे ॥78॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने सभी दुकानदारों से कहा, “प्रत्येक वस्तु से मुझे चार मुट्ठी भर प्रसाद दो।”
 
Swarup Damodar said to all the shopkeepers, “Give me four handfuls of Prasad from each basket.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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