श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  3.11.64 
हरिदासे समुद्र - जले स्नान कराइला ।
प्रभु कहे, - “समुद्र एइ ‘महा - तीर्थ’ ह - इला” ॥64॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने हरिदास ठाकुर के शरीर को समुद्र में स्नान कराया और फिर घोषणा की, “आज से यह समुद्र एक महान तीर्थ स्थल बन गया है।”
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu bathed Haridasa Thakura's body in the ocean and declared, "From today onwards this ocean has become a great pilgrimage site."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd