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श्लोक 3.11.48  |
अङ्गने आरम्भिला प्रभु महा - सङ्कीर्तन ।
वक्रेश्वर - पण्डित ताहाँ करेन नर्तन ॥48॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु ने तुरंत प्रांगण में महान सामूहिक कीर्तन आरंभ कर दिया। वक्रेश्वर पंडित मुख्य नर्तक थे। |
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| Hearing this, Sri Chaitanya Mahaprabhu immediately started a great sankirtan in the courtyard. |
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