| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण » श्लोक 41 |
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| | | | श्लोक 3.11.41  | आमा - हेन यदि एक कीट म रि’ गेल ।
एक पिपीलिका मैले पृथ्वीर काहाँ हानि हैल? ॥41॥ | | | | | | | अनुवाद | | "हे प्रभु, यदि मुझ जैसा तुच्छ कीड़ा मर जाए, तो क्या हानि है? यदि एक चींटी मर जाए, तो भौतिक जगत को क्या हानि है?" | | | | "O Lord, even if a lowly insect like me dies, what harm is it? If an ant dies, what harm is done to the material world? | | ✨ ai-generated | | |
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