| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण » श्लोक 38 |
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| | | | श्लोक 3.11.38  | किन्तु आमार ये किछु सुख, सब तोमा लञा ।
तोमार योग्य नहे , - याबे आमारे छाड़िया” ॥38॥ | | | | | | | अनुवाद | | "परन्तु जो भी सुख मुझे है, वह सब तुम्हारे संग के कारण है। तुम्हारा मुझे छोड़कर चले जाना उचित नहीं है।" | | | | But whatever happiness I have is due to your company. It is not fitting for you to go away and leave me alone." | | ✨ ai-generated | | |
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