ब्राह्मणाः पसदा ह्येते कथिताः पक्ति दूषकाः
एतान विवर्जयेद्यत्नात् श्राद्ध-कर्मणि पंडितः
इस छंद के अनुसार, यदि कोई ब्राह्मण परिवार में जन्मा है, परन्तु ब्राह्मणिक मानकों के अनुसार व्यवहार नहीं करता है, तो उसे श्राद्ध-पात्र अर्पित नहीं किया जाना चाहिए जो पितरों को अर्पित प्रसाद है। अद्वैत आचार्य ने श्राद्ध-पात्र हरिदास ठाकुर को अर्पित किया था, न कि एक ऐसे ब्राह्मण को, जो ब्राह्मण परिवार में जन्मा था। यद्यपि हरिदास ठाकुर मांसाहारी परिवार में जन्मे थे, क्योंकि वे एक उन्नत भक्त थे, उन्हें प्रथम श्रेणी के ब्राह्मण से भी अधिक सम्मान दिया गया था।
