श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 11: हरिदास ठाकुर का महाप्रयाण  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  3.11.101 
एइ त कहिलुँ हरिदासेर विजय ।
याहार श्रवणे कृष्णे दृढ़ - भक्ति हय ॥101॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने हरिदास ठाकुर के विजयी परिनिर्वाण के विषय में बताया है। जो कोई इस कथा को सुनेगा, उसका मन निश्चय ही कृष्ण भक्ति में दृढ़ हो जाएगा।
 
Thus I have described the glorious journey of Haridasa Thakura. Anyone who listens to this story will surely strengthen his mind in devotion to Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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