श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.10.92 
गोविन्दे देखिया प्रभु बले क्रुद्ध हञा ।
‘आजि केने एत - क्षण आछिस् वसिया? ॥92॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने गोविंद को अपने पास बैठे देखा, तो वे कुछ क्रोधित हुए। उन्होंने पूछा, "आज आप इतनी देर से यहाँ क्यों बैठे हैं?"
 
When Mahaprabhu saw Govinda sitting next to him, he became a little angry and asked, “Why have you been sitting here for so long today?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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