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श्लोक 3.10.76  |
सब लोकेर उथलिल आनन्द - सागर ।
सब लोक पासरिल देह - आत्म - घर ॥76॥ |
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| अनुवाद |
| दिव्य आनन्द का सागर उमड़ पड़ा और वहां उपस्थित सभी लोग अपना शरीर, मन और घर भूल गए। |
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| The ocean of divine bliss overflowed and every person present there forgot his body, mind and home. |
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