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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
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श्लोक 69
श्लोक
3.10.69
एइ पदे नृत्य करेन परम - आवेशे ।
सब - लोक चौदिके प्रभुर प्रेम - जले भासे ॥69॥
अनुवाद
बस इसी पंक्ति के कारण श्री चैतन्य महाप्रभु अत्यंत आनंदित होकर प्रेम में नाच रहे थे। उनके चारों ओर के लोग उनके आँसुओं के जल में तैर रहे थे।
This line alone caused Sri Chaitanya Mahaprabhu to dance in a deep ecstasy. People around him began to swim in the water of his tears.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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