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श्लोक 3.10.65  |
एइ - मत कत - क्षण कराइला कीर्तन ।
आपने नाचिते तबे प्रभुर हैल मन ॥65॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार भगवान ने कुछ समय तक सामूहिक कीर्तन करवाया, तत्पश्चात् स्वयं नृत्य करने की इच्छा हुई। |
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| In this way Mahaprabhu organised kirtan for some time, but then he himself felt like dancing. |
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