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श्लोक 3.10.39  |
सङ्क्षेपे कहिलुँ एइ झालिर विचार ।
‘राघवेर झालि’ बलि’ विख्याति याहार ॥39॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार मैंने संक्षेप में उन थैलियों का वर्णन किया है जो राघवेरा झाली के नाम से प्रसिद्ध हो गयी हैं। |
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| In this way I have briefly described those bags which are famous by the name of 'Raghav ki Jhaali'. |
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