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श्लोक 3.10.3  |
वर्षान्तरे सब भक्त प्रभुरे देखिते ।
परम - आनन्दे सबे नीलाचल याइते ॥3॥ |
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| अनुवाद |
| अगले वर्ष, सभी भक्तगण श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन हेतु जगन्नाथ पुरी [नीलाचल] जाने को लेकर बहुत प्रसन्न हुए। |
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| Next year all the devotees were very happy to go to Jagannathpuri (Nilachal) to have the darshan of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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