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श्लोक 3.10.160  |
श्रद्धा क रि’ शुने येइ चैतन्येर कथा ।
चैतन्य - चरणे प्रेम पाइबे सर्वथा ॥160॥ |
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| अनुवाद |
| जो व्यक्ति श्रद्धा और प्रेम के साथ श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का श्रवण करता है, उसे श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों में परम प्रेम अवश्य प्राप्त हो जाता है। |
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| One who listens to the pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu with devotion and love will certainly attain blissful love for the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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