श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  3.10.153 
गदाधर - पण्डित, भट्टाचार्य सार्वभौम ।
इँहा सबार आछे भिक्षार दिवस - नियम ॥153॥
 
 
अनुवाद
हर महीने गदाधर पंडित और सार्वभौम भट्टाचार्य ने तिथियां निश्चित कर रखी थीं, जिस दिन श्री चैतन्य महाप्रभु उनके निमंत्रण स्वीकार करते थे।
 
Gadadhara Pandit and Sarvabhauma Bhattacharya had fixed the dates when Sri Chaitanya Mahaprabhu would accept their invitation every month.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd