श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  3.10.128 
गोविन्द बले , - ‘राघवेर झालि मात्र आछे’ ।
प्रभु कहे, - ‘आजि रहु, ताहा देखिमु पाछे’ ॥128॥
 
 
अनुवाद
गोविंदा ने उत्तर दिया, "अब तो केवल राघव की थैलियाँ ही बची हैं।" भगवान ने कहा, "आज इन्हें रहने दो। मैं इन्हें बाद में देखूँगा।" भगवान ने कहा, "आज इन्हें रहने दो। मैं इन्हें बाद में देखूँगा।"
 
Govinda replied, "Now only Raghava's bags are left." Mahaprabhu said, "Leave them for today. I will look at them later."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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