श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.1.94 
एक - दिन रूप करेन नाटक लिखन ।
आचम्बिते महाप्रभुर हैल आगमन ॥94॥
 
 
अनुवाद
एक दिन जब रूप गोस्वामी अपनी पुस्तक लिख रहे थे, श्री चैतन्य महाप्रभु अचानक प्रकट हुए।
 
One day when Rupa Goswami was writing his book, Sri Chaitanya Mahaprabhu suddenly appeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)