श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.1.90 
स्वरूप कहे - “याते एइ श्लोक देखिलुँ ।
तुमि करियाछ कृपा, तबँहि जानिलु” ॥90॥
 
 
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने कहा, "जैसे ही मैंने इस श्लोक की अनूठी रचना देखी, मैं तुरन्त समझ गया कि आपने उस पर अपनी विशेष कृपा बरसाई है।
 
Svarupa Damodara said, “As soon as I saw the unique composition of this verse, I immediately understood that You had bestowed Your special grace on it.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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